James Derulo's

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राशन दुकान संचालको को सूचना का अधिकार लगाकर प्रताड़ित कर रहा है, इन्हे खाने की जानकारी है जो खाये हो उसकी जानकारी मांगे तो फिर उसकी जानकारी नही है। पीडीएस सिस्टम में कैसे फर्जी राशन देने की जानकारी तो रखते है, कैसे फर्जी संस्था बना कर राशन दुकान हथियाना है इसकी जानकारी रखते है, कैसे फर्जी लोग के नाम से राशन कार्ड बनवाकर राशन बांटा जाता है इसकी जानकारी है इनको, मगर ये जो कर रहे है इसकी जानकारी कोई और मांगे तो ये प्रताड़ित और ब्लेकमेलिंग होते है।
कांकेर जिले में किस तरह से भ्रष्टाचार हावी है उसका एक उदाहरण राशन दुकान के संचालको द्वारा सूचना जिला कलेक्टर कांकेर को किये गये शिकायत पत्र है। सारे भ्रष्टाचारी सूचना का अधिकार के तहत जानकारी मांगने वालों के खिलाफ हो रहे है एक जुट सबसे ज्यादा चारामा विकासखंण्ड के अफसरशाही और शासन के नुमाइंदे अपने आप को सूचना का अधिकार में प्रताड़ित, ब्लेकमेलिंग होना बता रहे है।

तो ये लोग क्या चाहते हैं सुचना के अधिकार अधिनियम को कलेक्टर महोदय ख़त्म कर दे ..???
 
एक तरफ वो है जो ईमानदारी से जानकारी मांगते है और खुद प्रताड़ित होते है तो दुसरे तरफ वो है जिनको जानकारी से कोई मतलब नहीं रहता जहा जानकारी देने वाले प्रताड़ित हो रहे है | सूचना का आधिकार अधिनियम में जानकारी मांगने पर अक्सर चोर,भ्रष्ट लोग ब्लेक मेलिग़ होते है जो कई ब्लेक कारनामे करते है ये अपने आप को प्रताड़ित और ब्लेक मेलिग़ होना बताते है| उन्हें अपने आप से सवाल करना चाहिए की वो क्यों ब्लेक्मेलिग़ का शिकार हो रहे है | 
 इसिलिए ब्लेक करों मत ब्लेक होने से डरों मत, पहले खाये हो अब प्रताड़ित हो रहे है बोल रहे है

 ये इस प्रकार के काम करने में ये माहिर है पहले भी इन्होंने जनहित का नाम लेकर वसूली करते आ रहे थे लेकिन जब संबंधित अखबार मालिकों को मालूम हुआ तो जनहित की बात करने वाले चोर वसूलीबाज पत्रकार को हवालात की हवा खानी तथा अखबार प्रतिनिधियों की पैर पकडकर दुबारा ऐसी गलती नही करनी की कसम भी खाई थी लेकिन मै उन अखबार प्रतिनिधियों को आगाह करना चाहता हॅू कि आज भी ये जनहित मुददा वाला पत्रकार अपने स्वजाति बंधु ब्लैकमेलर व कई बार थूक कर चौखट चटाने वाले साथी के साथ अवैध वसूली कर कुछ हदों तक अपने कार्यो के प्रति जवाबदार लोगों को ब्लैकमेर कहने से नही चूकते..... यदि बाकी पत्रकार ब्लैकमेलर है तो ये ईमानदार पत्रकार ये बताने का कश्ट करेगें कि इंडिया केन संस्था को किस प्रकार मानव तस्कारी करने की बात कहते हुये 25 हजार रूपये मांगा जा रहा था पैसे नही देने पर आदिवासी की तस्करी का आरोप लगाकर समाचार छपवाने की धमकी तक दे चुके थे ये ईमानदार पत्रकार इन दोनों की ईमानदारी यही खत्म नही होती इन्होंने तो मुझे एक समाचार प्रकाषन पर कई ठगों से नोटिस व न जाने कितने हथकंडे अपनाते हुये डरने का प्रयास किया लेकिन इन चोरों को मै बताना चाहता हॅू कि मेरा बाप गरीब जरूर है लेकिन दलाल नही....... अगर पत्रकारिता के आड में दलाली ही करना है तो अधिकारी के बिस्तर खुद सो जाओं नही अपने घर के बहू बेटी व पत्नी को सुला दो ज्यादा कमाई होगी़़़़.....लेकिन पत्रकारिता जैसे पाक पेषे को बदनाम मत करों माद़़़़.......

एक और खास बात है कि जनहित की सोच से पत्रकारिता कर रहे उक्त ईमानदार पत्रकार ने कंाकेर जिले के किसानी विभाग का दलाल का पदवी भी प्राप्त कर लिया है...अगर आप विभाग के बारे में कोई समाचार प्रकाशित होता है तो ये दोनांे अधिकारी के भडवे तत्काल समाचार प्रकाषित करने वाले पत्रकार की कमजोरी बता धमकी देते हुये डराने का तरीका बताने का काम भी करते है,.....जैसे मुझे मिला...तीन बजे 07587121053 के नंबर से...धमकी....क्यो ना लिखू मैं समाचार..?

पहला मामला...विक्रम उसेंडी के रिश्तेदारों द्वारा खुटगांव मार्ग मे हजारों एकड वन कटाई के मामले पर एक पत्रकार ने अपनी जान जोखिम डालकर सनसनी खेज समाचार निकाला था लेकिन इस माद.....ने तत्काल उस समाचार को छपवाकर डीएफआंे वाहने के पास अपनी दबगंई पत्रकारिता के आड में तत्काल 5 हजार रूपया लेकर आ गये लेकिन जब खोजी एंव वरिश्ट पत्रकार को रूपये लेने बात मालूम हुई तो वे इस भडवे पर आगबबूला हो गये जिसके कारण इस हरामखोर ने उनके प्रकोप से बचने के कई लिये दलील व गवाहों को पेष करते नजर आये थे.........वाह रे कमीना दलाल.........कभी खुद के दम पर षिकार करने की भी कोषिष कर लिया कर.............जुटहा कही के
दुसरा मामला... नीलकंड परियोजना....में एक पत्रकार ने काफी मेहनत करते हुये अपने फेसबुक वाल पर आम जनता के पढने के लिये समाचार प्रकाषित किया लेकिन युवा वनमंडल अधिकारी माथेष्वरण से तवज्जों नही मिलने के कारण खिसयानी बिल्ली खंभा नोचें सोच वाले इस चोर ने अपने आपकों दंबंग पत्रकार बताने की कोषिष मंे.... वन विभाग की एैसी तैसी करने के लिये उक्त समाचार की चोरी करते हुये अपने अखबार में छपवा लिया लेकिन जब समाचार चोरी कर प्रकाषन की बात उस पत्रकार को लगी तो इस चोर ब्लैकमेलर के हाथ पंाव फूलने लगे और अपना अखबार षहर में बटंवाने नही देते हुये पूरा पेपर का बंडल अपने घर ले जाकर कई तरह का दलील लोगों को देने लगा आप खुद ही सोचिये जरा कि क्या ऐसे भडवे...दलाल..चोर......ब्लेकमेलर को पत्रकारिता जैसे पाक पेषे में होना चाहिये ? इस चोर पत्रकार ने कभी अवैध कटाई का मामला भी नही पकडा होगा लेकिन .....अपनी मेहनत से अवैध कटाई का मामला उजागर करने वाले पत्रकार की आड पर उक्त मामले जनहित का मुददा बताया......... अरे ब्लेकमेलर....माद.... अन्य जनहित का मुददा तुझे क्यों नजर नही आता फटती है़़ क्या........?